आर्म लिफ्ट (ब्रेकियोप्लास्टी) | आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीक
चिकित्सीय रूप से प्रमाणित व समीक्षित: प्रमाणित: डॉ. विशाल पुरोहित (MCh प्लास्टिक सर्जरी) • RMC Reg. 28041/14185 • अक्टूबर 2026
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकआर्म लिफ्ट सर्जरी के विभिन्न प्रकार (Types of Arm Lift) क्या हैं?
#
आर्म लिफ्ट सर्जरी के विभिन्न प्रकार (Types of Arm Lift) क्या हैं?
#आर्म लिफ्ट के मुख्य प्रकारों में मिनी (ट्रांसएक्सिलरी) ब्रेकियोप्लास्टी, शॉर्ट-स्कार ब्रेकियोप्लास्टी, ट्रेडिशनल (फुल) ब्रेकियोप्लास्टी, एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी और लिपोसक्शन-असिस्टेड ब्रेकियोप्लास्टी शामिल हैं, जिनका चुनाव। डॉ. विशाल पुरोहित त्वचा के ढीलेपन के अनुसार करते हैं।
सर्जरी का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि ढीली त्वचा कहाँ तक फैली है। मिनी आर्म लिफ्ट में चीरा केवल बगल के गड्ढे में छुपा होता है, जो ऊपरी हिस्से की हल्की ढीली त्वचा के लिए उपयुक्त है। शॉर्ट-स्कार में चीरा बांह के ऊपरी एक-तिहाई हिस्से तक आता है। ट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी में चीरा बगल से कोहनी तक अंदरूनी रेखा में लगाया जाता है जो पूरी बांह की लटकन को ठीक करता है। एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी भारी वजन घटाने वाले मरीजों के लिए होती है, जिसमें चीरा बगल को पार करके छाती के बगल तक जाता है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित मरीज की बनावट देखकर सबसे सटीक तकनीक चुनते हैं।
सही तकनीक से सबसे छोटा निशान और बेहतरीन कसाव मिलता है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक कम्प्रेशन गारमेंट पहनना होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी (Traditional Brachioplasty) क्या होती है?
#
ट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी (Traditional Brachioplasty) क्या होती है?
#ट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी आर्म लिफ्ट का सबसे प्रामाणिक रूप है, जिसमें बगल से लेकर कोहनी तक अंदरूनी हिस्से में चीरा लगाकर लटकी हुई अतिरिक्त त्वचा और चर्बी को पूरी तरह हटा दिया जाता है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह सर्जरी उन मरीजों के लिए सबसे उपयुक्त है जिनकी बाहों की त्वचा पूरी लंबाई में लटक रही होती है। इसमें चीरे का निशान बांह के अंदरूनी हिस्से (मीडियल बाइसिपिटल ग्रूव) में इस तरह लगाया जाता है कि हाथ नीचे रखने पर वह शरीर की तरफ छुपा रहे और सामने से न दिखे। सर्जरी के दौरान अंदरूनी नसों (MACN) और मुख्य नसों को पूरी सुरक्षा दी जाती है। अंदरूनी परतों को विशेष मजबूत टांकों से कसा जाता है ताकि खिंचाव मांसपेशियों पर रहे, त्वचा पर नहीं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस प्रक्रिया से पूरी बांह को एकदम सीधा और सुडौल बना देते हैं।
पूरी बांह की लटकन हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकमिनी आर्म लिफ्ट (Mini Arm Lift) क्या होती है?
#
मिनी आर्म लिफ्ट (Mini Arm Lift) क्या होती है?
#मिनी आर्म लिफ्ट एक छोटे चीरे वाली सर्जरी है जिसमें केवल बगल (Armpit) के अंदर चीरा लगाकर ऊपरी बांह की हल्की ढीली त्वचा को खींचकर कस दिया जाता है, जिससे बांह पर कोई निशान नहीं दिखता, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह सर्जरी उन लोगों के लिए बहुत अच्छी है जिनकी त्वचा पूरी कोहनी तक नहीं लटकती, बल्कि केवल कंधे और बगल के पास ही हल्की ढीली होती है। इसमें चीरा पूरी तरह बगल के प्राकृतिक गड्ढे में छुपा होता है, इसलिए हाथ पर कोई लंबा निशान नहीं आता। बगल के अंदर से ही त्वचा को ऊपर की तरफ खींचकर अंदरूनी फेशिया से मजबूती से सिल दिया जाता है। स्लीवलेस कपड़े पहनने पर भी किसी को पता नहीं चलता कि कोई सर्जरी हुई है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित उन युवाओं के लिए यह तकनीक चुनते हैं जिनकी त्वचा में हल्का ढीलापन होता है।
निशान पूरी तरह बगल में छुपा रहता है। 5 से 7 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 सप्ताह तक कम्प्रेशन गारमेंट पहनना होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकलिमिटेड-इंसिजन आर्म लिफ्ट (Limited-Incision Arm Lift) क्या होती है?
#
लिमिटेड-इंसिजन आर्म लिफ्ट (Limited-Incision Arm Lift) क्या होती है?
#लिमिटेड-इंसिजन आर्म लिफ्ट एक ऐसी तकनीक है जिसमें चीरे को केवल बगल और बांह के सबसे ऊपरी हिस्से तक सीमित रखा जाता है, जिससे कोहनी तक लंबा निशान नहीं आता, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह तकनीक उन मरीजों के लिए बनाई गई है जिनकी त्वचा मिनी लिफ्ट से ठीक होने लायक थोड़ी ज्यादा ढीली है, लेकिन इतनी भी नहीं कि कोहनी तक पूरा चीरा लगाना पड़े। इसमें चीरा बगल के गड्ढे से शुरू होकर बांह के ऊपरी हिस्से में केवल 3 से 5 सेंटीमीटर नीचे तक ही आता है। इससे बांह के ऊपरी हिस्से की त्वचा बहुत अच्छी तरह कस जाती है और नीचे की दो-तिहाई बांह पर कोई निशान नहीं पड़ता। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित कम से कम निशान में बेहतरीन परिणाम देने के लिए इस तकनीक का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हैं।
कम निशान में सुंदर और संतुलित कसाव मिलता है। 5 से 7 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 सप्ताह तक कम्प्रेशन स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकशॉर्ट-स्कार ब्रेकियोप्लास्टी (Short-Scar Brachioplasty) क्या होती है?
#
शॉर्ट-स्कार ब्रेकियोप्लास्टी (Short-Scar Brachioplasty) क्या होती है?
#शॉर्ट-स्कार ब्रेकियोप्लास्टी एक ऐसी आर्म लिफ्ट सर्जरी है जिसमें चीरे का निशान केवल बांह के ऊपरी आधे हिस्से तक ही रहता है और कोहनी तक नहीं पहुंचता।
जब किसी मरीज की त्वचा केवल कंधे और बगल के पास लटकी होती है और कोहनी के पास की त्वचा बिल्कुल टाइट होती है, तो कोहनी तक चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती। ऐसी स्थिति में डॉ. विशाल पुरोहित बांह के ऊपरी हिस्से में ही एक छोटा चीरा लगाते हैं। साथ ही बांह के निचले हिस्से में हल्की लिपोसक्शन कर दी जाती है ताकि पूरी बांह एक समान पतली दिखे। इससे नीचे की बांह पर कोई निशान नहीं आता और ऊपर की लटकी चमड़ी पूरी तरह हट जाती है। जयपुर में डॉ. पुरोहित इस तकनीक से बहुत प्राकृतिक परिणाम देते हैं।
कम निशान में बांह का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सुडौल हो जाता है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकएक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी (Extended Brachioplasty) क्या होती है?
#
एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी (Extended Brachioplasty) क्या होती है?
#एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी एक उन्नत सर्जरी है जिसमें चीरा कोहनी से शुरू होकर, बगल को पार करता हुआ छाती के बगल (Lateral Chest) तक जाता है ताकि बांह और ब्रा के पास की लटकी त्वचा एक साथ हट सके, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह सर्जरी उन मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली होती है जिनका बहुत ज्यादा वजन (20 से 50 किलो) घटा होता है। ऐसे लोगों में चमड़ी केवल बांह पर ही नहीं लटकती, बल्कि बगल और छाती के बगल में भी बड़े-बड़े रोल बन जाते हैं। एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी में एक ही निरंतर चीरे द्वारा बांह की लटकन और छाती की सिलवटों को एक साथ हटा दिया जाता है। हाथ उठाने में कोई रुकावट न आए, इसके लिए बगल में विशेष घुमावदार टांके (Z-Plasty) लगाए जाते हैं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित भारी वजन घटाने वाले मरीजों को यह संपूर्ण समाधान प्रदान करते हैं।
बांह और छाती की लटकन एक ही बार में ठीक हो जाती है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक कम्प्रेशन गारमेंट पहनना होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकएक्सटेंडेड आर्म लिफ्ट (Extended Arm Lift) किसे कहते हैं?
#
एक्सटेंडेड आर्म लिफ्ट (Extended Arm Lift) किसे कहते हैं?
#एक्सटेंडेड आर्म लिफ्ट एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी का ही दूसरा नाम है; यह कोहनी से लेकर बगल और छाती के बगल तक की अत्यधिक लटकी त्वचा को हटाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को सुडौल बनाती है।
जब कोई मरीज भारी वजन कम करता है, तो त्वचा का ढीलापन बांह के खत्म होने पर रुकता नहीं है, बल्कि छाती के बगल में ब्रा की पट्टी के नीचे भी चमड़ी मुड़कर लटकती है। केवल बांह की सर्जरी करने से बगल के पास त्वचा की गांठ जैसी बन सकती है। एक्सटेंडेड आर्म लिफ्ट में चीरे को थोड़ा नीचे छाती की तरफ बढ़ाकर दोनों हिस्सों को एकदम सपाट और चिकना कर दिया जाता है। इससे बगल में पसीना आना, खुजली और बदबू हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस तकनीक से शरीर का पूरा संतुलन बहाल करते हैं।
शरीर का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सुडौल और हल्का हो जाता है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकमीडियल आर्म लिफ्ट (Medial Arm Lift) क्या होती है?
#
मीडियल आर्म लिफ्ट (Medial Arm Lift) क्या होती है?
#मीडियल आर्म लिफ्ट एक ऐसी तकनीक है जिसमें चीरे का निशान बांह के बिल्कुल अंदरूनी हिस्से (शरीर की तरफ) लगाया जाता है ताकि हाथ नीचे रखने पर निशान पूरी तरह छुपा रहे, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
प्लास्टिक सर्जरी में निशान को छुपाना सबसे महत्वपूर्ण कला मानी जाती है। मीडियल तकनीक में चीरा बांह के उस अंदरूनी हिस्से में लगाया जाता है जो चलते या खड़े रहते समय आपके सीने की तरफ रहता है। इसलिए जब आप सामान्य रूप से खड़े होते हैं, तो न तो आगे से और न ही पीछे से कोई निशान दिखाई देता है। सर्जरी के दौरान अंदरूनी परतों को इस तरह बांधा जाता है कि निशान अपनी जगह से खिसक कर आगे या पीछे न आए। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित सुंदरता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए इस तकनीक को प्राथमिकता देते हैं।
निशान शरीर की तरफ पूरी तरह छुपा रहता है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक सपोर्ट स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकवर्टिकल आर्म लिफ्ट (Vertical Arm Lift) क्या होती है?
#
वर्टिकल आर्म लिफ्ट (Vertical Arm Lift) क्या होती है?
#वर्टिकल आर्म लिफ्ट एक ऐसी सर्जरी है जिसमें चीरा बांह की लंबाई में ऊपर से नीचे (बगल से कोहनी तक) लगाया जाता है ताकि बांह की पूरी गोलाई को कम करके टाइट किया जा सके, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
जब बांह बहुत मोटी और लटकी हुई होती है, तो केवल बगल में आड़ा चीरा लगाने से काम नहीं चलता; उससे बांह की गोलाई कम नहीं हो पाती। जैसे किसी ढीली आस्तीन को टाइट करने के लिए लंबाई में सिलाई की जाती है, वैसे ही वर्टिकल आर्म लिफ्ट में पूरी लंबाई में अतिरिक्त चमड़ी को काटकर निकाला जाता है। इससे बांह का घेरा कई सेंटीमीटर कम हो जाता है और हाथ बिल्कुल पतले व सुडौल हो जाते हैं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस तकनीक से बांह की चौड़ाई को बहुत खूबसूरती से घटाते हैं।
बांह की गोलाई में जबर्दस्त कमी आती है। 7 से 10 दिनों में सामान्य कामकाज शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकहाई-इंसिजन आर्म लिफ्ट (High-Incision Arm Lift) क्या होती है?
#
हाई-इंसिजन आर्म लिफ्ट (High-Incision Arm Lift) क्या होती है?
#हाई-इंसिजन आर्म लिफ्ट एक विशेष तकनीक है जिसमें चीरे को बांह में काफी ऊपर बगल के पास या पिछले हिस्से में लगाया जाता है ताकि मरीज के कपड़ों के अनुसार निशान पूरी तरह छुप सके, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
हर मरीज की जरूरत और कपड़े पहनने की पसंद अलग होती है। कुछ मरीज चाहते हैं कि हाथ उठाने पर भी सामने से कोई निशान न दिखे, इसलिए चीरे को बांह के पिछले हिस्से में ट्राइसेप्स के किनारे पर थोड़ा ऊपर रखा जाता है। कुछ मरीजों में निशान को बिल्कुल बगल के अंदर ही सीमित कर दिया जाता है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित सर्जरी से पहले शीशे के सामने मरीज की बांह पर मार्क लगाकर दिखाते हैं ताकि मरीज अपनी पसंद के हिसाब से निशान की जगह तय कर सके।
मरीज की पसंद के अनुसार निशान को छुपाया जाता है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकमिनी आर्म लिफ्ट और फुल आर्म लिफ्ट में क्या अंतर (Mini vs Full Arm Lift) है?
#
मिनी आर्म लिफ्ट और फुल आर्म लिफ्ट में क्या अंतर (Mini vs Full Arm Lift) है?
#मिनी आर्म लिफ्ट में केवल बगल के अंदर छोटा चीरा लगाकर ऊपरी हिस्से की हल्की ढीली त्वचा हटाई जाती है, जबकि फुल आर्म लिफ्ट में बगल से कोहनी तक चीरा लगाकर पूरी बांह की लटकन हटाई जाती है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित समझाते हैं।
दोनों में मुख्य अंतर निशान की लंबाई और त्वचा हटाने की क्षमता का है। यदि किसी की त्वचा केवल कंधे के पास हल्की ढीली है, तो मिनी आर्म लिफ्ट से काम चल जाता है और हाथ पर कोई निशान नहीं आता। लेकिन यदि त्वचा कोहनी तक झूल रही है, तो मिनी आर्म लिफ्ट से कोई फायदा नहीं होगा; उसके लिए फुल आर्म लिफ्ट ही करानी पड़ती है ताकि पूरी कोहनी तक की चमड़ी को टाइट किया जा सके। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित क्लिनिकल जांच करके बताते हैं कि आपकी बांह के लिए कौन सी प्रक्रिया सही रहेगी।
सही चयन से अधूरा परिणाम रहने का खतरा नहीं रहता। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकट्रेडिशनल और एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी में क्या अंतर (Traditional vs Extended) है?
#
ट्रेडिशनल और एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी में क्या अंतर (Traditional vs Extended) है?
#ट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी केवल बगल से कोहनी तक की बांह की त्वचा को ठीक करती है, जबकि एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी बगल को पार करके छाती के बगल की त्वचा (ब्रा रोल्स) को भी हटाती है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित स्पष्ट करते हैं।
जब किसी मरीज की समस्या केवल बांह तक सीमित होती है, तो ट्रेडिशनल ब्रेकियोप्लास्टी सबसे अच्छी होती है। लेकिन भारी वजन घटाने वाले मरीजों में बांह की लटकी चमड़ी सीधे छाती और बगल की सिलवटों से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि केवल बांह का ऑपरेशन किया जाए, तो बगल में चमड़ी की गांठ जैसी बन जाती है। एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी में चीरे को छाती तक बढ़ाकर उस गांठ और ब्रा की सिलवटों को भी पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित हर मरीज की जरूरत के अनुसार सही सर्जरी चुनते हैं।
दोनों में से सही विकल्प से ही संपूर्ण सुंदरता मिलती है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकमेरे लिए कौन सी आर्म लिफ्ट सर्जरी सबसे अच्छी (Best Type for Me) है?
#
मेरे लिए कौन सी आर्म लिफ्ट सर्जरी सबसे अच्छी (Best Type for Me) है?
#आपके लिए सबसे अच्छी आर्म लिफ्ट सर्जरी इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी त्वचा कितनी लटकी है, चर्बी कितनी है और ढीलापन कोहनी या छाती तक फैला है या नहीं, जिसकी सटीक जांच। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
कोई भी एक सर्जरी सभी मरीजों के लिए सही नहीं होती। यदि आपकी त्वचा केवल ऊपर थोड़ी सी ढीली है, तो मिनी आर्म लिफ्ट सबसे अच्छी है। यदि पूरी बांह लटक रही है, तो ट्रेडिशनल आर्म लिफ्ट करानी होगी। और यदि भारी वजन घटाने के बाद बगल और छाती पर भी चमड़ी लटक रही है, तो एक्सटेंडेड आर्म लिफ्ट सबसे बेहतरीन परिणाम देगी। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित मरीज के शरीर, त्वचा की गुणवत्ता और उम्मीदों का गहन विश्लेषण करके सबसे सुरक्षित और प्रभावी तकनीक की सलाह देते हैं।
सही चयन से ही सबसे सुंदर और संतोषजनक परिणाम मिलते हैं। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकसर्जन कैसे तय करते हैं कि कौन सी ब्रेकियोप्लास्टी तकनीक (How Surgeon Decides) उपयोग करनी है?
#
सर्जन कैसे तय करते हैं कि कौन सी ब्रेकियोप्लास्टी तकनीक (How Surgeon Decides) उपयोग करनी है?
#प्लास्टिक सर्जन त्वचा के ढीलेपन की मेडिकल ग्रेडिंग (पिट्सबर्ग स्केल), पिंच टेस्ट द्वारा लटकन की नाप और चर्बी की मोटाई देखकर सबसे उपयुक्त तकनीक तय करते हैं, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह निर्णय पूरी तरह वैज्ञानिक और मेडिकल मानकों पर आधारित होता है। डॉ. विशाल पुरोहित मरीज को खड़ा करके हाथ उठवाते हैं और देखते हैं कि लटकन केवल ऊपर है, कोहनी तक है या छाती तक फैली है। यदि लटकन 2-3 सेमी है तो छोटी तकनीक चुनी जाती है; यदि 5 सेमी से ज्यादा है तो पूरी लंबाई वाली सर्जरी आवश्यक होती है। साथ ही मरीज की त्वचा की हीलिंग क्षमता और मेडिकल इतिहास की भी समीक्षा की जाती है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित मरीज को हर पहलू समझाकर ही आगे बढ़ते हैं।
वैज्ञानिक तरीके से सही तकनीक का चुनाव होता है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक कम्प्रेशन स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या बिना लंबे निशान के ब्रेकियोप्लास्टी (Without Long Scar) कराई जा सकती है?
#
क्या बिना लंबे निशान के ब्रेकियोप्लास्टी (Without Long Scar) कराई जा सकती है?
#बिना लंबे निशान के ब्रेकियोप्लास्टी केवल तभी संभव है जब ढीलापन बहुत कम और केवल बांह के ऊपरी हिस्से तक सीमित हो; यदि त्वचा ज्यादा लटक रही है, तो पूरा चीरा लगाना ही पड़ता है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित समझाते हैं।
निशान की लंबाई इस बात पर निर्भर करती है कि कितनी चमड़ी काटनी है। जैसे किसी बड़े कपड़े को बिना ज्यादा काटे छोटा नहीं किया जा सकता, वैसे ही कोहनी तक लटकी चमड़ी को छोटे चीरे से नहीं हटाया जा सकता। यदि जबरदस्ती छोटे चीरे से ज्यादा त्वचा खींचने की कोशिश की जाए, तो त्वचा में झोल या सिलवटें पड़ सकती हैं जो निशान से भी ज्यादा खराब दिखती हैं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित चीरे को बांह के अंदरूनी हिस्से में इस तरह लगाते हैं कि वह समय के साथ बहुत बारीक और हल्का हो जाए।
सटीक तकनीक से निशान बहुत बारीक भरते हैं। 7 से 10 दिनों में सामान्य कामकाज शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या हल्की ढीली त्वचा के लिए मिनी आर्म लिफ्ट (Mini Lift for Mild Laxity) सही है?
#
क्या हल्की ढीली त्वचा के लिए मिनी आर्म लिफ्ट (Mini Lift for Mild Laxity) सही है?
#हाँ, यदि आपकी त्वचा केवल बांह के ऊपरी हिस्से में हल्की ढीली है, तो मिनी आर्म लिफ्ट सबसे बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह बिना किसी दिखने वाले निशान के बांह को कस देती है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित बताते हैं।
जिन लोगों का 4-5 किलो वजन घटा हो या उम्र के शुरुआती असर से केवल बगल के पास त्वचा मुड़ रही हो, उनके लिए मिनी आर्म लिफ्ट एकदम सही है। इसमें चीरा पूरी तरह बगल के अंदर छुपा रहता है जिससे हाथ पर कोई निशान नहीं आता। साथ ही बांह के बाकी हिस्से में हल्की लिपोसक्शन करके बांह को पूरी तरह स्लिम बना दिया जाता है। मरीज बिना किसी झिझक के छोटे कपड़े पहन सकते हैं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित हल्की ढीली त्वचा वाले मरीजों के लिए यह न्यूनतम इनवेसिव तकनीक अपनाते हैं।
हल्के ढीलेपन में यह सबसे सुरक्षित और सुंदर प्रक्रिया है। 5 से 7 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या अत्यधिक लटकी त्वचा के लिए फुल आर्म लिफ्ट (Full Lift for Severe Sagging) जरूरी है?
#
क्या अत्यधिक लटकी त्वचा के लिए फुल आर्म लिफ्ट (Full Lift for Severe Sagging) जरूरी है?
#हाँ, जब त्वचा कोहनी तक अत्यधिक लटक रही हो, तो फुल आर्म लिफ्ट कराना बिल्कुल अनिवार्य है क्योंकि केवल यही तकनीक पूरी बांह की अतिरिक्त त्वचा को हटा सकती है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित स्पष्ट करते हैं।
जब त्वचा में भारी ढीलापन होता है, तो वह कोहनी के ऊपर तक झूलती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई छोटा चीरा लगाया जाए, तो कोहनी के पास की चमड़ी वैसी ही लटकती रह जाएगी और सर्जरी कराने का कोई फायदा नहीं होगा। फुल आर्म लिफ्ट में बगल से लेकर कोहनी तक पूरी लंबाई में चीरा लगाकर अतिरिक्त चमड़ी और चर्बी को एक साथ निकाल दिया जाता है। अंदरूनी परतों को मजबूती से सिलने के बाद बांह बिल्कुल सीधी और कसी हुई हो जाती है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस प्रक्रिया से गंभीर मामलों में भी बेहतरीन परिणाम देते हैं।
गंभीर लटकन में संपूर्ण समाधान केवल फुल लिफ्ट से मिलता है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या चीरा बगल से कोहनी तक (Incision from Armpit to Elbow) जा सकता है?
#
क्या चीरा बगल से कोहनी तक (Incision from Armpit to Elbow) जा सकता है?
#हाँ, ट्रेडिशनल आर्म लिफ्ट में चीरा बगल से शुरू होकर कोहनी के ठीक ऊपर तक जाता है ताकि पूरी बांह की लटकी त्वचा को एक समान रूप से हटाया जा सके, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
यह चीरा बांह के अंदरूनी हिस्से में एक सीधी रेखा में लगाया जाता है। डॉ. विशाल पुरोहित इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि चीरा कोहनी के मुड़ने वाले जोड़ को न छुए, बल्कि उससे 1-2 सेमी ऊपर ही रुक जाए। इससे कोहनी मोड़ने या हाथ सीधा करने में कोई खिंचाव या रुकावट नहीं आती। यदि कोहनी के पास भी बहुत ज्यादा चमड़ी हो, तो वहां विशेष घुमावदार टांके (Z-Plasty) लगाए जाते हैं ताकि निशान में सिकुड़न न आए और हाथ पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करे। जयपुर में डॉ. पुरोहित इस तकनीक में अत्यधिक कुशल हैं।
पूरी बांह में एक समान कसाव आता है और हाथ की गतिशीलता पूरी तरह सुरक्षित रहती है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या चीरा छाती की दीवार (Incision onto Chest Wall) तक जा सकता है?
#
क्या चीरा छाती की दीवार (Incision onto Chest Wall) तक जा सकता है?
#हाँ, एक्सटेंडेड ब्रेकियोप्लास्टी में चीरा बगल को पार करके छाती के बगल तक जाता है ताकि बांह के साथ-साथ ब्रा के पास लटकने वाली छाती की चमड़ी को भी हटाया जा सके, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
भारी वजन घटाने वाले मरीजों में त्वचा का ढीलापन छाती के बगल तक फैला होता है। यदि चीरे को केवल बगल में ही रोक दिया जाए, तो बगल में त्वचा की सिलवटें रह जाती हैं जो ब्रा या कपड़े पहनने पर बाहर निकलती हैं। चीरे को थोड़ा नीचे छाती की तरफ ले जाने से बांह और छाती दोनों एक ही साथ बिल्कुल सपाट और सुंदर हो जाते हैं। बगल के गड्ढे में हाथ उठाने में कोई रुकावट न हो, इसके लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित मरीजों को यह संपूर्ण कायाकल्प प्रदान करते हैं।
बांह और छाती की लटकन एक साथ दूर होती है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक कम्प्रेशन गारमेंट पहनना होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या लिपोसक्शन-असिस्टेड तकनीक (Liposuction-Assisted Techniques) से आर्म लिफ्ट की जा सकती है?
#
क्या लिपोसक्शन-असिस्टेड तकनीक (Liposuction-Assisted Techniques) से आर्म लिफ्ट की जा सकती है?
#हाँ, लिपोसक्शन-असिस्टेड ब्रेकियोप्लास्टी एक आधुनिक और सुरक्षित तकनीक है जिसमें पहले लिपोसक्शन द्वारा चर्बी निकाली जाती है और फिर अतिरिक्त त्वचा को काटा जाता है।
पारंपरिक तरीके में त्वचा और चर्बी दोनों को छुरी से काटा जाता था जिससे नसों और लसिका वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता था। आधुनिक लिपोसक्शन-असिस्टेड तकनीक में पहले विशेष पतली कैन्युला से चर्बी को पिघलाकर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अंदरूनी नसें (MACN) और खून की नलियां बिल्कुल सुरक्षित बच जाती हैं। इसके बाद केवल खाली हो चुकी त्वचा को ऊपर-ऊपर से काट दिया जाता है। इससे खून का रिसाव बहुत कम होता है, पानी भरने (सीरोमा) का जोखिम न के बराबर रहता है और बाहें बहुत पतली बनती हैं। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस सुरक्षित तकनीक का उपयोग करते हैं।
रिकवरी बहुत तेज और सुरक्षित होती है। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या लिपोसक्शन-असिस्टेड ब्रेकियोप्लास्टी पारंपरिक सर्जरी से बेहतर (Better Than Traditional) है?
#
क्या लिपोसक्शन-असिस्टेड ब्रेकियोप्लास्टी पारंपरिक सर्जरी से बेहतर (Better Than Traditional) है?
#हाँ, लिपोसक्शन-असिस्टेड ब्रेकियोप्लास्टी पारंपरिक सर्जरी से कहीं बेहतर और सुरक्षित है क्योंकि इसमें पानी भरने (सीरोमा) का खतरा 70% तक घट जाता है और बांह की नसों की पूरी सुरक्षा होती है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित बताते हैं।
पारंपरिक सर्जरी में चर्बी को काटने से कई बार लसिका ग्रंथियां (Lymphatics) कट जाती थीं जिससे हाथ में लंबे समय तक सूजन रहती थी। आधुनिक लिपोसक्शन-असिस्टेड तकनीक में चर्बी को धीरे से खींचकर निकाला जाता है, जिससे नसों और लसिका वाहिकाओं का जाल पूरी तरह सुरक्षित रहता है। इसके कारण सर्जरी के बाद हाथ में सुन्नपन नहीं आता और सूजन बहुत तेजी से उतरती है। बांह का आकार भी बहुत प्राकृतिक और चिकना बनता है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित इस तकनीक को सबसे सुरक्षित और आधुनिक मानक मानते हैं।
सूजन बहुत कम रहती है और घाव जल्दी भरते हैं। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या न्यूनतम इनवेसिव (Minimally Invasive) तकनीकों से आर्म लिफ्ट की जा सकती है?
#
क्या न्यूनतम इनवेसिव (Minimally Invasive) तकनीकों से आर्म लिफ्ट की जा सकती है?
#हाँ, केवल हल्की ढीली त्वचा में लिपोसक्शन के साथ रेडियोफ्रीक्वेंसी (BodyTite) जैसी न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है; लेकिन अत्यधिक लटकी चमड़ी को हटाने के लिए सर्जरी ही अनिवार्य है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित बताते हैं।
न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों में बिना बड़े चीरे के बहुत बारीक सुई जैसे छेदों से काम किया जाता है। कैन्युला द्वारा चर्बी निकाली जाती है और अंदर से रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा देकर त्वचा के अंदरूनी रेशों को थोड़ा सिकोड़ दिया जाता है। यह तकनीक उन लोगों के लिए बहुत अच्छी है जिनकी त्वचा में हल्का ढीलापन है और जो बिल्कुल निशान नहीं चाहते। लेकिन यदि बांह से भारी चमड़ी नीचे झूल रही है, तो केवल सर्जरी द्वारा उसे काटकर ही हटाया जा सकता है। जयपुर में डॉ. विशाल पुरोहित मरीज की स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त सलाह देते हैं।
हल्के मामलों में बिना बड़े निशान के अच्छा सुधार मिलता है। 3 से 5 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 2 से 3 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकक्या एंडोस्कोपिक (Endoscopic Arm Lift) आर्म लिफ्ट सर्जरी संभव है?
#
क्या एंडोस्कोपिक (Endoscopic Arm Lift) आर्म लिफ्ट सर्जरी संभव है?
#नहीं, लटकी हुई त्वचा को हटाने के लिए एंडोस्कोपिक आर्म लिफ्ट चिकित्सकीय रूप से संभव नहीं है क्योंकि अतिरिक्त चमड़ी को काटकर बाहर निकालना जरूरी होता है जो छोटे छेदों से नहीं हो सकता, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित स्पष्ट करते हैं।
एंडोस्कोपी का उपयोग उन ऑपरेशनों में होता है जहाँ केवल अंदर से मांसपेशियों को सिलना होता है और कोई त्वचा नहीं काटनी होती (जैसे पेट या माथे की सर्जरी)। लेकिन आर्म लिफ्ट में मुख्य समस्या बाहर लटकती हुई फालतू चमड़ी की होती है। उस चमड़ी को शरीर के अंदर नहीं छुपाया जा सकता; उसे नापकर काटकर बाहर निकालना ही पड़ता है। इसलिए एंडोस्कोपिक आर्म लिफ्ट का दावा केवल एक भ्रामक प्रचार है। जयपुर में एम.सीएच. प्लास्टिक सर्जन डॉ. विशाल पुरोहित मरीजों को हमेशा वैज्ञानिक और सच्ची जानकारी देते हैं।
अतिरिक्त त्वचा का केवल सर्जिकल निकास ही संभव है। 7 से 10 दिनों में ऑफिस का काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक कम्प्रेशन गारमेंट पहनना होता है।
आर्म लिफ्ट सर्जरी के प्रकार और तकनीकब्रेकियोप्लास्टी में त्वचा हटाने (Skin Excision) और लिपोसक्शन (Liposuction) में क्या अंतर है?
#
ब्रेकियोप्लास्टी में त्वचा हटाने (Skin Excision) और लिपोसक्शन (Liposuction) में क्या अंतर है?
#त्वचा हटाने में लटकी हुई ढीली चमड़ी को काटकर बाहर निकाला जाता है, जबकि लिपोसक्शन में अंदर की अतिरिक्त चर्बी को पिघलाकर निकाला जाता है; दोनों को मिलाकर सबसे सुंदर परिणाम मिलता है, जैसा। डॉ. विशाल पुरोहित करते हैं।
दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग परतों पर काम करती हैं। लिपोसक्शन केवल बांह की मोटाई और चर्बी को कम करता है, लेकिन यह लटकी त्वचा को नहीं काटता। वहीं स्किन एक्सीशन लटकी हुई अतिरिक्त चमड़ी को काटकर बांह को टाइट बनाता है। आधुनिक आर्म लिफ्ट में डॉ. विशाल पुरोहित पहले लिपोसक्शन करके बांह की चर्बी को निकालते हैं जिससे बांह पतली हो जाती है, और फिर खाली हुई ढीली त्वचा को काटकर हटा देते हैं। इस दोहरी तकनीक से बाहें पतली भी होती हैं और पूरी तरह कसी हुई भी। जयपुर में डॉ. पुरोहित इस संयुक्त तकनीक में विशेष रूप से अनुभवी हैं।
दोहरी तकनीक से संपूर्ण और बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। 7 से 10 दिनों में सामान्य काम शुरू हो जाता है और 3 से 4 सप्ताह तक स्लीव्स पहननी होती हैं।
