अगर आप अपनी छाती के उभार या आकार को लेकर परेशान हैं, तो सबसे पहला और ज़रूरी कदम एक सही मेडिकल जांच (डायग्नोसिस) करवाना है। डॉ. विशाल पुरोहित की क्लिनिक में, जांच की शुरुआत सबसे पहले क्लिनिकल परीक्षण और छूकर देखने (direct palpation) से होती है; जब इमेजिंग की ज़रूरत हो, तब अल्ट्रासाउंड (ultrasound) या एमआरआई (MRI) कराया जाता है, और हार्मोनल असंतुलन के अन्य लक्षण दिखने पर ही हार्मोन ब्लड टेस्ट की सलाह दी जाती है। बहुत से पुरुष इस स्थिति को लेकर झिझक या शर्मिंदगी महसूस करते हैं, लेकिन यह समझना बेहद ज़रूरी है कि “मैन बूब्स” (man boobs) एक पहचानी गई मेडिकल समस्या है, कोई व्यक्तिगत कमी या विफलता नहीं।
यद्यपि इसके कारणों को समझना ज़रूरी है, फिर भी जिन पुरुषों में ग्लैंडुलर टिश्यू (ग्रंथि के ऊतक) बने रहते हैं, वे अंततः सर्जरी द्वारा सुधार पर विचार करते हैं। डॉ. विशाल पुरोहित जयपुर में गाइनेकोमास्टिया सर्जरी में विशेषज्ञता रखते हैं, जिसका उद्देश्य छाती को एक सपाट और अधिक मर्दाना आकार (कंटूर) देना है। इस गाइड में हम विस्तार से समझेंगे कि यह स्थिति वास्तव में क्या है, क्यों होती है, और इसे सामान्य वजन बढ़ने से कैसे अलग पहचाना जाए।
गाइनेकोमास्टिया पुरुषों की छाती (स्तन) को प्रभावित करने वाली सबसे आम समस्या है। यह ग्लैंडुलर और सहायक टिश्यू की एक बिनाइन (गैर-कैंसरयुक्त) वृद्धि है [1], जो आमतौर पर निप्पल के ठीक नीचे बटन के आकार की गांठ जैसी दिखती और महसूस होती है [2]। डॉ. विशाल पुरोहित की प्रैक्टिस के अनुसार, गाइनेकोमास्टिया कभी भी कोई बहुत सख्त या कठोर गांठ (hard lump) नहीं होता; कठोर गांठ किसी अन्य स्थिति जैसे कि कार्सिनोमा (कैंसर) या किसी टेंस सिस्ट की ओर इशारा करती है, जिसके लिए तुरंत एमआरआई या अल्ट्रासाउंड और ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) से परामर्श की आवश्यकता होती है।
मुख्य बात: गाइनेकोमास्टिया एक चिकित्सीय स्थिति है, जो आमतौर पर हार्मोनल संतुलन में बदलाव के कारण होती है। कुछ कारण, जैसे कि प्यूबर्टी (किशोरावस्था), एक स्वाभाविक दौर होते हैं; वहीं अन्य कारण, जैसे कि कुछ दवाएं, एनाबॉलिक स्टेरॉयड या कोई आंतरिक बीमारी, जिनका पता लगाकर इलाज किया जा सकता है। एंडोक्रिनोलॉजिस्ट के पास रेफरल केवल तभी किया जाता है जब गाइनेकोमास्टिया प्यूबर्टी पूरी होने के काफी समय बाद अचानक विकसित हो, या जब हार्मोनल असंतुलन के अन्य लक्षण मौजूद हों। सबसे पहले कारण का पता लगाना ज़रूरी होता है।
“हर किसी को अपने शरीर को लेकर अच्छा और आत्मविश्वास से भरा महसूस करने का पूरा हक है।” — डॉ. विशाल पुरोहित
गाइनेकोमास्टिया क्या है? (चिकित्सीय परिभाषा)

गाइनेकोमास्टिया (आम बोलचाल में अक्सर “मैन बूब्स” कहा जाता है) पुरुषों में ब्रेस्ट टिश्यू का बढ़ जाना है [3]।
अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में ब्रेस्ट ग्लैंड्स (स्तन ग्रंथियां) होती हैं; पुरुषों में ये आमतौर पर दिखाई या महसूस नहीं होतीं [3]।
पुरुषों के शरीर में मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन बनता है, लेकिन थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजन भी होता है। एस्ट्रोजन ब्रेस्ट टिश्यू को बढ़ाता है, जबकि टेस्टोस्टेरोन इस वृद्धि को रोकता है। इसलिए जब संतुलन एस्ट्रोजन की ओर झुक जाता है, तो ग्लैंडुलर टिश्यू बढ़ सकते हैं [3]।
ट्रू गाइनेकोमास्टिया बनाम स्यूडो-गाइनेकोमास्टिया

उन स्थितियों में अंतर समझना बेहद ज़रूरी है जो देखने में एक जैसी लग सकती हैं [4]:
ट्रू गाइनेकोमास्टिया
इसमें ग्लैंडुलर टिश्यू की वृद्धि होती है, जो निप्पल के नीचे एक ठोस, बटन जैसी डिस्क के रूप में महसूस होती है और छूने पर हल्की दर्दभरी हो सकती है [2]। कसरत करने या वजन घटाने से यह ब्रेस्ट टिश्यू कम नहीं होता [3]।।
स्यूडो-गाइनेकोमास्टिया
यह बिना ग्लैंडुलर वृद्धि के केवल फैट जमाव के कारण होता है और मोटापे से ग्रस्त पुरुषों में छाती के बढ़ने का यह सबसे बड़ा कारण है। यह किसी गांठ की बजाय पूरी छाती के आकार में सामान्य वृद्धि जैसा दिखता है [2], और वजन घटाना व कसरत इसका पहला उपचार है [4]। डॉ. विशाल पुरोहित अत्यधिक मोटे (obese और massively obese) पुरुषों की सर्जरी नहीं करते, क्योंकि इसमें सर्जिकल जोखिम बहुत अधिक होता है और बाद में वजन घटने पर त्वचा लटक सकती है, जिसे ठीक करने के लिए दोबारा सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है; इसके लिए सामान्य सीमा में बीएमआई होने का लक्ष्य रखा जाता है, हालांकि थोड़े अधिक वजन वाले पुरुषों को भी बिना इंतज़ार किए सर्जरी से लाभ मिल सकता है।
मिक्स्ड गाइनेकोमास्टिया
इसमें बढ़ी हुई ग्रंथि और अतिरिक्त चर्बी दोनों मौजूद होते हैं [4]।।
क्या आपको सर्जरी की आवश्यकता है?
हमेशा नहीं। प्यूबर्टी के दौरान होने वाला गाइनेकोमास्टिया अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है, और जब किसी दवा या बीमारी के कारण ऐसा होता है, तो पहला कदम उस बीमारी का इलाज करना या संबंधित दवा को बंद करना होता है [5]।
डॉ. पुरोहित का नोट: डॉ. विशाल पुरोहित गाइनेकोमास्टिया के लिए दवाएं नहीं लिखते हैं, क्योंकि प्यूबर्टी वाले गाइनेकोमास्टिया में दवाओं की ज़रूरत नहीं होती और एक बार जब ग्रंथि को सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है तो वह दोबारा नहीं बढ़ सकती। इसके अलावा, उनकी प्रैक्टिस में किशोरों (teenagers) में सर्जरी पर विचार प्यूबर्टी पूरी होने के कम से कम 2 साल बाद ही किया जाता है।
सर्जरी की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है जब गाइनेकोमास्टिया 12 महीने से अधिक समय तक बना रहे और अपने आप या चिकित्सकीय इलाज से ठीक न हुआ हो [4]। यदि आप यह तय कर रहे हैं कि क्या यह प्रक्रिया आपके लिए सही है, तो कई कारक सर्जरी के लिए आपकी पात्रता और उपयुक्तता निर्धारित करते हैं।
साइमन वर्गीकरण बनाम रोहरिच ग्रेडिंग सिस्टम
सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले दो ग्रेडिंग सिस्टम साइमन (Simon) और रोहरिच (Rohrich) के हैं [6]। साइमन (1973) छाती के आकार और ढीली त्वचा के आधार पर ग्रेड तय करता है [7]; वहीं रोहरिच टिश्यू के अनुमानित वजन और लटकने की स्थिति (ptosis) के आधार पर ग्रेडिंग करता है [8]।
नीचे दी गई तालिका में दोनों की तुलना अगल-बगल की गई है; ये एक-दूसरे के बिल्कुल हूबहू समकक्ष नहीं हैं।
| साइमन ग्रेड [7] | इसका क्या अर्थ है | रोहरिच ग्रेड [8] | इसका क्या अर्थ है |
|---|---|---|---|
| Grade I | मामूली उभार, अतिरिक्त त्वचा नहीं | Grade I | न्यूनतम हाइपरट्रॉफी (250 g से कम), कोई ptosis (लटकाव) नहीं |
| Grade IIa | मध्यम उभार, अतिरिक्त त्वचा नहीं | Grade II | मध्यम हाइपरट्रॉफी (250–500 g), कोई ptosis नहीं |
| Grade IIb | मध्यम उभार, थोड़ी अतिरिक्त त्वचा के साथ | Grade III | गंभीर हाइपरट्रॉफी (500 g से अधिक), grade I ptosis के साथ |
| Grade III | अतिरिक्त त्वचा के साथ अत्यधिक उभार, जो लटकते हुए महिला स्तन जैसा दिखता है | Grade IV | गंभीर हाइपरट्रॉफी, grade II या III ptosis के साथ |
यह क्यों होता है? इसके मूल कारण
इलाज करवाने से पहले गाइनेकोमास्टिया के क्या कारण हैं इसे समझना सबसे पहला कदम है।

डॉ. विशाल पुरोहित समझाते हैं कि कैसे ट्रू गाइनेकोमास्टिया सक्रिय ग्लैंडुलर ग्रोथ से फाइब्रोसिस में बदल सकता है: प्यूबर्टी के दौरान होने वाले गाइनेकोमास्टिया में दवाओं की जरूरत नहीं होती है, और एक बार जब ग्लैंड को सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है तो यह दोबारा नहीं बढ़ सकता [9]; जो गाइनेकोमास्टिया बना रहता है और फाइब्रस (कठोर) हो जाता है, उसे आमतौर पर सर्जरी से ठीक किया जाता है [4]।
मुख्य कारण: हार्मोनल असंतुलन (हार्मोनल इम्बैलेंस)
ट्रू गाइनेकोमास्टिया के पीछे की मुख्य वजह एस्ट्रोजेन (फीमेल हार्मोन) और टेस्टोस्टेरोन जैसे एंड्रोजन (मेल हार्मोन) के बीच का असंतुलन है [3]।
पुरुषों में मुख्य रूप से टेस्टोस्टेरोन बनता है, लेकिन उनके शरीर में थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजेन भी बनता है। यदि यह संतुलन बिगड़ता है—चाहे टेस्टोस्टेरोन में कमी आने से या एस्ट्रोजेन का स्तर बढ़ने से—तो ब्रेस्ट टिशू को बढ़ने का संकेत मिलता है [3]। लगभग चार में से एक मामले में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता है (इडियोपैथिक गाइनेकोमास्टिया) [5]।
उम्र के अनुसार सामान्य कारण (ट्रिगर्स)


डॉ. विशाल पुरोहित ने पुरुषों के जीवनकाल में फिजियोलॉजिकल गाइनेकोमास्टिया के कारणों पर यह जानकारीपूर्ण इन्फोग्राफिक तैयार किया है, ताकि मरीज सर्जिकल विकल्पों पर विचार करने से पहले हार्मोनल बदलावों और इसके अपने आप ठीक होने के पैटर्न को समझ सकें।
प्यूबर्टी / किशोरावस्था (फिजियोलॉजिक गाइनेकोमास्टिया)
प्यूबर्टी के दौरान लड़कों के शरीर में कई तरह के शारीरिक (फिजियोलॉजिकल) बदलाव होते हैं। कभी-कभी हार्मोन के स्तर में यह असंतुलन कुछ समय के लिए हो जाता है।
- आंकड़े: प्यूबर्टी के दौरान लगभग 60–90% किशोर लड़कों में फिजियोलॉजिक गाइनेकोमास्टिया देखा गया है [10]।
- भविष्य की संभावना (आउटलुक): शुरुआत के छह महीने से लेकर दो साल के भीतर इसे अपने आप ठीक हो जाना चाहिए; अगर यह दो साल से अधिक समय तक बना रहता है या 17 साल की उम्र के बाद भी रहता है, तो आगे जांच कराने की सलाह दी जाती है [5]। कुछ लड़कों में यह अपने आप कम नहीं होता है, और ग्लैंड बड़ा व फाइब्रस हो जाता है [4]।
- सर्जिकल टाइमिंग: सर्जरी द्वारा सुधार पर विचार करने वाले किशोरों के लिए, डॉ. विशाल पुरोहित प्यूबर्टी पूरी होने के कम से कम 2 साल बाद सर्जरी के लिए सही उम्र और समय का मूल्यांकन करते हैं।
दवाओं के कारण होने वाला गाइनेकोमास्टिया (मेडिकेशन-इंड्यूस्ड)
लगभग 10 से 25% मामलों के लिए दवाएं और अन्य पदार्थ जिम्मेदार होते हैं [5]। इनमें आम तौर पर शामिल हैं:
- एंटी-एंड्रोजेन्स (बढ़े हुए प्रोस्टेट या प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं) [11]।
- एनाबॉलिक स्टेरॉयड (अक्सर बॉडीबिल्डिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले) [3]।
- चिंता कम करने वाली (एंटी-एंजायटी) दवाएं जैसे कि डायजेपाम, और दिल की कुछ दवाएं, जिनमें कुछ निश्चित ACE इनहिबिटर्स और कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स शामिल हैं [11]।
डॉ. विशाल पुरोहित के क्लिनिकल अनुभव में, स्टेरॉयड और गाइनेकोमास्टिया के प्रबंधन के लिए सर्जरी से कम से कम 6 हफ्ते पहले स्टेरॉयड और प्रोहार्मोन का उपयोग पूरी तरह बंद करना जरूरी है, हालांकि 3 महीने पहले बंद करना ज्यादा बेहतर होता है।
डॉक्टर से सलाह लिए बिना अपनी सुझाई गई कोई भी दवा खुद से बंद न करें [11]।
मोटापा और लाइफस्टाइल
फैट टिशू (वसायुक्त ऊतक) अरोमाटेज (aromatase) का एक प्रमुख स्रोत हैं, जो एक ऐसा एंजाइम है जो टेस्टोस्टेरोन को एस्ट्रोजेन में बदलता है [12], इसलिए मोटापे के कारण शरीर में एस्ट्रोजेन बढ़ सकता है [11]। हालांकि, सिर्फ सीने पर अतिरिक्त फैट का होना स्यूडोग्वाइडनेकोमास्टिया (pseudogynecomastia) कहलाता है, न कि ग्लैंड का बढ़ना [4]।
गाइनेकोमास्टिया और वजन घटाना का मूल्यांकन यह स्पष्ट करने में मदद करता है कि सर्जरी के लिए कौन उपयुक्त है। थोड़े अधिक वजन (ओवरवेट) वाले पुरुष बिना इंतजार किए सर्जरी का लाभ ले सकते हैं। बहुत अधिक मोटे (obese) पुरुषों की सर्जरी नहीं की जाती है क्योंकि इसमें जोखिम बहुत अधिक होता है और बाद में वजन कम होने पर त्वचा लटक सकती है, जिसे ठीक करने के लिए दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
मिथक: प्रोटीन सप्लीमेंट्स गाइनेकोमास्टिया का कारण बनते हैं या इसे बदतर बनाते हैं।
तथ्य: प्रोटीन सप्लीमेंट्स का गाइनेकोमास्टिया को बढ़ाने या घटाने में कोई रोल नहीं होता है, जबकि चेस्ट की मसल्स बढ़ने से ग्लैंड बाहर की ओर उभर सकता है और अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है।
पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं (क्रोनिक बीमारियां) हार्मोनल असंतुलन पैदा करती हैं
कभी-कभी गाइनेकोमास्टिया किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत होता है, जो हार्मोन के बनने या टूटने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
डॉ. विशाल पुरोहित की डायग्नोस्टिक प्रैक्टिस में, जांच की शुरुआत सबसे पहले क्लिनिकल परीक्षण और सीधे छूकर देखने (पैलपेशन) से होती है। जरूरत पड़ने पर इसके बाद अल्ट्रासाउंड (ultrasound) या एमआरआई (MRI) जैसी इमेजिंग की जाती है, जबकि हार्मोनल ब्लड टेस्ट केवल तभी करवाए जाते हैं जब हार्मोनल असंतुलन के अन्य लक्षण मौजूद हों [5]।
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) के पास रेफरल केवल तभी किया जाता है जब गाइनेकोमास्टिया अचानक उभरे, प्यूबर्टी पूरी होने के काफी समय बाद शुरू हुआ हो, या हार्मोन असंतुलन के अन्य लक्षण दिखाई दें।
एक क्लिनिकल मूल्यांकन कई प्रणालीगत स्थितियों को खारिज करने के लिए गाइनेकोमास्टिया की जांच और निदान कैसे किया जाता है इसका विश्लेषण करता है:
- लिवर की बीमारी और सिरोसिस: लिवर में खराबी आने से एस्ट्रोजेन के टूटने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है; शराब से जुड़ी लिवर की बीमारी वाले पुरुषों में इसका जोखिम अधिक होता है [5]।
- किडनी फेलियर: क्रोनिक किडनी इनसफिशिएंसी (गुर्दे की पुरानी खराबी) इसके ज्ञात कारणों में से एक है [5]।
- हाइपोगोनेडिज्म: टेस्टोस्टेरोन का कम उत्पादन, चाहे वह अंडकोष (टेस्टिस) की किसी समस्या (प्राइमरी) के कारण हो या उन हार्मोनल संकेतों की खराबी से हो जो उन्हें संचालित करते हैं (सेकेंडरी), गाइनेकोमास्टिया का कारण बन सकता है; क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome) वाले लगभग आधे पुरुषों में यह समस्या होती है [5]।
- थायराइड की बीमारी: हाइपरथायरायडिज्म वाले 10 से 40% पुरुषों में गाइनेकोमास्टिया देखने को मिलता है, और थायराइड के सामान्य होने पर यह एक से दो महीने में ठीक हो जाता है [5]।
- ट्यूमर: बहुत कम मामलों में (लगभग 3%), ट्यूमर इसके लिए जिम्मेदार होते हैं, जैसे कि टेस्टिकुलर लेडिग (Leydig) या सर्टोली (Sertoli) सेल ट्यूमर, एड्रिनल ट्यूमर या ऐसे कैंसर जो एचसीजी (hCG) हार्मोन का उत्पादन करते हैं [5]।
लक्षण: क्या ध्यान देना चाहिए

आपको कैसे पता चलेगा कि आपको गाइनेकोमास्टिया है? इन संकेतों पर ध्यान दें:
मुख्य बिंदु
- सामान्य लक्षणों में निप्पल के नीचे एक सख्त या संवेदनशील गांठ, ऊतकों में सूजन और उभरे हुए एरोला (areola) शामिल हैं।
- गाइनेकोमास्टिया आमतौर पर दोनों तरफ होता है, लेकिन एकतरफा होने पर यह आमतौर पर बाएं स्तन को प्रभावित करता है।
- एक सख्त या स्थिर गांठ, निप्पल से स्राव, या त्वचा में बदलाव दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता होती है।
- सूजन या गांठ: निप्पल के नीचे बटन के आकार का उभार जिसे आप देख या छूकर महसूस कर सकते हैं; यह आसानी से हिल-डुल सकता है और यह एक या दोनों स्तनों को प्रभावित कर सकता है [2]।
- छूने पर दर्द (Tenderness): उस हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है [11]।
- बनावट (Texture): ग्लैंड का ऊतक (glandular tissue) निप्पल के नीचे एक सख्त, रबर जैसी डिस्क की तरह महसूस होता है, जबकि चर्बी (फैट) छूने में अधिक मुलायम और फैली हुई महसूस होती है [10]।
- “पफी निप्पल” (Puffy nipple): लगभग 8 से 10% मरीजों में स्तनों का आकार अधिक बढ़े बिना ही केवल एरोला (areola) बड़ा और बाहर की ओर उभरा हुआ दिखता है [8]।
गाइनेकोमास्टिया आमतौर पर दोनों तरफ होता है; जब यह केवल एक तरफ होता है, तो यह अक्सर बाईं तरफ देखा जाता है [5]।
तुरंत जांच कब करानी चाहिए: यदि गांठ सख्त हो, हिले-डुले नहीं, त्वचा में बदलाव दिखे, निप्पल अंदर धंस रहा हो, निप्पल से स्राव (डिस्चार्ज) आ रहा हो या बगल की लिम्फ ग्रंथियां (लिम्फ नोड्स) बढ़ गई हों, तो जब तक जांच से स्थिति स्पष्ट न हो जाए, तब तक ब्रेस्ट कैंसर की आशंका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए [5]। पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर गाइनेकोमास्टिया की तुलना में बहुत दुर्लभ है, लेकिन इन दोनों में फर्क समझने के लिए यदि आपको पुरुषों की छाती में गांठ महसूस होती है तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी है [2]।

डॉ. विशाल पुरोहित का यह शैक्षणिक इन्फोग्राफिक सच्चे गाइनेकोमास्टिया की ग्लैंडुलर डिस्क और स्यूडोगाइनेकोमास्टिया के फैट टिश्यू के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। एक सटीक जांच ही सही उपचार योजना तय करने में मदद करती है।
गाइनेकोमास्टिया के 4 ग्रेड (Grades)

सर्जरी की योजना बनाने के लिए सर्जन स्थिति की गंभीरता के अनुसार इसका वर्गीकरण करते हैं। यह ग्रेडिंग गाइनेकोमास्टिया सर्जरी के खर्च को भी प्रभावित करती है: कल्पना एस्थेटिक्स में ग्रेड और तकनीक के आधार पर यह शुल्क ₹45,000 से ₹95,000 के बीच होता है।
क्लिनिकल मूल्यांकन में गाइनेकोमास्टिया के ग्रेड्स को निर्धारित करने के लिए साइमन (Simon) सिस्टम का पालन किया जाता है [7]:
- ग्रेड 1 (Grade 1): हल्का उभार जिसमें त्वचा में कोई खिंचाव या ढीलापन नहीं होता; यह “पफी निप्पल” जैसा दिख सकता है [8]।
- ग्रेड 2 (Grade 2): मध्यम उभार जिसमें त्वचा में ढीलापन नहीं होता।
- ग्रेड 3 (Grade 3): मध्यम उभार के साथ त्वचा में थोड़ा ढीलापन।
- ग्रेड 4 (Grade 4): अत्यधिक उभार के साथ त्वचा में काफी ढीलापन, जो महिला के स्तन जैसा दिखाई देता है।
कल्पना एस्थेटिक्स में, सामान्य ग्रेड्स की सर्जरी में आमतौर पर 60 से 120 मिनट का समय लगता है, जबकि ग्रेड 4 या बहुत बड़े गाइनेकोमास्टिया में लगभग 4 घंटे तक लग सकते हैं। ड्रेन केवल ग्रेड 4 में ही लगाए जाते हैं; कम ग्रेड्स में आमतौर पर इनकी आवश्यकता नहीं होती है।
क्या इसका इलाज संभव है?

हाँ। किशोरावस्था (प्यूबर्टी) का गाइनेकोमास्टिया अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है, और किसी दवा या बीमारी के कारण होने वाले गाइनेकोमास्टिया का प्रबंधन सबसे पहले उस मूल कारण का इलाज करके किया जाता है [5]। हालांकि, जो ग्लैंडुलर टिश्यू लंबे समय तक बना रहता है, वह रेशेदार (फाइब्रस) हो सकता है और अपने आप ठीक नहीं होता [4]। गाइनेकोमास्टिया उपचार के विकल्पों की पूरी श्रृंखला को समझने से प्रत्येक चरण के लिए सही दृष्टिकोण स्पष्ट करने में मदद मिलती है।
-
दवाइयों द्वारा उपचार (Medical Treatment): टैमोक्सीफेन (tamoxifen) और रेलोक्सीफीन (raloxifene) जैसी दवाएं सबसे अधिक उपयोग की जाती हैं, और ये तब मददगार हो सकती हैं जब इन्हें शुरुआती अवस्था में दिया जाए, इससे पहले कि ग्लैंड फाइब्रस हो जाए [9]। हालांकि, प्यूबर्टी वाले गाइनेकोमास्टिया में दवाइयों की जरूरत नहीं होती है, और जब ग्लैंड को सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है तो यह दोबारा नहीं बढ़ सकता, जबकि सर्जरी कभी भी की जाए उसके परिणाम समान रूप से अच्छे मिलते हैं [5]। फाइब्रस टिश्यू बनने से पहले दवा उपचार की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते समय यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
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सर्जरी द्वारा उपचार (Surgical Treatment): स्थायी मामलों के लिए, सर्जरी में आमतौर पर आसपास के फैट का लिपोसक्शन (liposuction) और ग्लैंडुलर टिश्यू को सीधे निकालना दोनों शामिल होते हैं; जिन पुरुषों में अत्यधिक ढीली और लटकी हुई त्वचा होती है, उन्हें अधिक व्यापक प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है [6]। कल्पना एस्थेटिक्स में, डॉ. विशाल पुरोहित लोकल या जनरल एनेस्थीसिया के तहत, एरोला के निचले हिस्से के किनारे पर एक कम दिखने वाले चीरे के माध्यम से वासर (VASER) या पावर-असिस्टेड लिपोसक्शन के साथ ग्लैंड को निकालने की प्रक्रिया करते हैं। निकाले गए सभी टिश्यू को हिस्टोपैथोलॉजी (histopathology) जांच के लिए भेजा जाता है।
क्या आप अपना आत्मविश्वास वापस पाने के लिए तैयार हैं?
यदि आपको लगता है कि आपको गाइनेकोमास्टिया है, तो आपको इसके साथ जीने की जरूरत नहीं है। एक परामर्श से निदान की पुष्टि हो सकती है और किसी अन्य समस्या की आशंका खारिज की जा सकती है।
“हर व्यक्ति अपने शरीर को लेकर अच्छा और आत्मविश्वास से भरा महसूस करने का हकदार है।” (डॉ. विशाल पुरोहित)
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अपनी विजिट के दौरान, आप जयपुर में गाइनेकोमास्टिया सर्जरी के लिए व्यक्तिगत विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं, सर्जिकल तकनीक की समीक्षा कर सकते हैं, और उपलब्ध तकनीक को समझ सकते हैं।
हमारी टीम निम्नलिखित को कवर करते हुए व्यापक विवरण प्रदान करती है:
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यह शैक्षणिक जानकारी है, चिकित्सीय सलाह नहीं।




