फैट ग्राफ्टिंग (वसा ट्रांसफर) | फैट निकालना, शुद्धिकरण और कोलमैन तकनीक
चिकित्सीय रूप से प्रमाणित व समीक्षित: प्रमाणित: डॉ. विशाल पुरोहित (MCh प्लास्टिक सर्जरी) • RMC Reg. 28041/14185 • अक्टूबर 2026
फैट निकालना, शुद्धिकरण और कोलमैन तकनीकफैट ग्राफ्टिंग में चर्बी कैसे निकाली, साफ की और लगाई जाती है?
#
फैट ग्राफ्टिंग में चर्बी कैसे निकाली, साफ की और लगाई जाती है?
#फैट को विशेष पतली कैनुला से बहुत हल्के दबाव में निकाला जाता है, सेंट्रीफ्यूज या फिल्टर से शुद्ध किया जाता है और फिर 1 मिमी के बारीक सुराखों से बूंद-बूंद करके लगाया जाता है।
निकाले गए फैट में से खून और पानी को अलग करके केवल जीवित व स्वस्थ फैट कोशिकाओं को चुना जाता है। इसे छोटी सी सिरिंज से विभिन्न परतों में बहुत बारीकी से डाला जाता है।
बारीक बूंदों में लगाने से नई रक्त नलिकाएं जल्दी जुड़ती हैं और फैट के जीवित रहने की दर सबसे अधिक होती है।
फैट निकालना, शुद्धिकरण और कोलमैन तकनीकमैक्रोफैट, माइक्रोफैट और नैनोफैट में क्या अंतर है?
#
मैक्रोफैट, माइक्रोफैट और नैनोफैट में क्या अंतर है?
#मैक्रोफैट शरीर में बड़े भराव के लिए, माइक्रोफैट चेहरे की रूपरेखा के लिए और नैनोफैट त्वचा की चमक व झुर्रियां मिटाने वाले स्टेम सेल्स के लिए होता है।
माइक्रोफैट गालों, गड्ढों और आंखों के नीचे वॉल्यूम देता है। नैनोफैट में चर्बी के बड़े कणों को तोड़कर तरल बना दिया जाता है जिसमें भरपूर स्टेम सेल्स होते हैं जो त्वचा की रंगत और निशानों को सुधारते हैं।
एक ही सर्जरी में माइक्रोफैट से चेहरा भरा जाता है और नैनोफैट से त्वचा में नया निखार लाया जाता है।
