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फैट ग्राफ्टिंग (वसा ट्रांसफर)

फैट ग्राफ्टिंग (वसा ट्रांसफर) | स्ट्रक्चरल फैट ग्राफ्टिंग के सामान्य प्रश्न

प्रमाणित: डॉ. विशाल पुरोहित (MCh प्लास्टिक सर्जरी) • RMC Reg. 28041/14185 • अक्टूबर 2026

प्रमाणित चिकित्सीय उत्तर
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स्ट्रक्चरल फैट ग्राफ्टिंग (ऑटोलॉगस फैट ट्रांसफर / लिपोफिलिंग) क्या है?

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स्ट्रक्चरल फैट ग्राफ्टिंग एक आधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें शरीर के किसी हिस्से (जैसे पेट या जांघ) से अतिरिक्त फैट निकालकर चेहरे, स्तनों, हाथों या गड्ढों वाले निशानों में ट्रांसफर किया जाता है।

क्लिनिकल प्रमाण एवं पैथोलॉजी (Clinical Context)

चूंकि इसमें मरीज का अपना ही फैट उपयोग होता है, इसलिए किसी एलर्जी या रिजेक्शन का कोई खतरा नहीं रहता। कोलमैन तकनीक से फैट को छानकर शुद्ध किया जाता है और जीवित कोशिकाओं को नई जगह पर प्रत्यारोपित किया जाता है।

सर्जिकल रिकवरी एवं पोस्ट-ऑप प्रोटोकॉल

यह प्राकृतिक और स्थायी वॉल्यूम प्रदान करता है और त्वचा की चमक व कसावट को भी बेहतर बनाता है।

समीक्षक:Dr. Vishal Purohit, MBBS, MS, MCh (Plastic Surgery)•RMC पंजीकरण 28041/14185•अंतिम समीक्षा: अक्टूबर 2026
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सिंथेटिक फिलर्स और इम्प्लांट्स की तुलना में फैट ग्राफ्टिंग के क्या फायदे हैं?

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फैट ग्राफ्टिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह 100% प्राकृतिक है, स्थायी परिणाम देता है और इसमें मौजूद स्टेम सेल्स त्वचा को दोबारा नया जीवन देते हैं।

क्लिनिकल प्रमाण एवं पैथोलॉजी (Clinical Context)

बाजार के फिलर्स 1 साल में घुल जाते हैं और बार-बार लगाने पड़ते हैं, जबकि इम्प्लांट्स में विदेशी वस्तु का जोखिम रहता है। फैट ग्राफ्टिंग एक बार टिक जाने के बाद जीवनभर बनी रहती है।

सर्जिकल रिकवरी एवं पोस्ट-ऑप प्रोटोकॉल

साथ ही, जिस हिस्से से फैट निकाला जाता है वहां की अनचाही चर्बी भी कम हो जाती है।

समीक्षक:Dr. Vishal Purohit, MBBS, MS, MCh (Plastic Surgery)•RMC पंजीकरण 28041/14185•अंतिम समीक्षा: अक्टूबर 2026
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